Shradhanjali

पुलवामा हमले में शहीद हुए मां भारती के वीर सपूतों के चरणों में मेरे कवि मन की एक विनम्र श्रद्धांजलि :

लिखूं क्या आज मैं, दिल में
इक सिहरन सी होती है।
लहू बहता है आंखों से,
दिल की धड़कन क्यूं रोती है।।

तिरंगे में लिपट कांधे चढ़े
जब वीर भारत के
ये संगींनें सिसकती है
ये वर्दियां क्यूं रोती है।
लहू बहता…….

मिटा सिंदूर मांगों का
टूटे कंगन भी हाथों के
सुहागन थी वो कल तक
आज, क्या खोकर वो रोती है।
लहू बहता ……

वो बहना की जो राखी था
वो लाठी था बुढा़पे की
उठा कर अर्थी कांधों पे
बूढ़ी आंखें क्यूं रोती हैं।
लहू बहता …….

मां का आंचल भी सूना है
है सूनी राहें भाई की
कभी होती थी किलकारी
वो अब क्यूं यों बिलखती है ।
लहू बहता …..……

उन्हें क्या दोष दूं , क़ातिल हैं
दुश्मन हैं जो इंसां के
अमन की हर कली क्यूं
दहशतों से लाज खोती है
लहू बहता ………

जवां था खून उनका,
थे जवानी के हसीं सपने
वो भटके नौजवां नफरत की
जिनमें आग होती है
लहू बहता …….

बदल डालो चलन जिसमें
यूं बेगैरत झलकती है
कि गद्दारों की हरकत पे
मादरेहिन्द रोती है ।
लहू बहता है ……..

लबों पे प्यार के दो बोल
मुहब्बत की वो तकरीरें,
नहीं समझेगा वो फितरत
जिसकी जहरीली होती है ।
लहू बहता है ……….

अगर दुश्मन है अपना भी
तो फिर क्यूं दोस्ती रक्खें
कुचलना फन यूं सांपों का
समझदारी ही होती है ।
लहू बहता है ..……..

मिटा दो हस्तियां उनकी
निगाह नापाक हो जिनकी
मेरी मां भारती की आज
तुम को ये चुनौती है ।
लहू बहता है ……

Dr. P. Goyal

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